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ट्रम्प की मेजबानी के कुछ दिनों बाद शी ने पुनः पुतिन के साथ रिश्ते गहरे किए

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने मध्य पूर्व में जारी संघर्ष को रोकने की अपील करते हुए वैश्विक शांति की आवश्यकता पर जोर दिया है। उन्होंने रूस के यूक्रेन युद्ध पर सीधे तौर पर चर्चा से बचते हुए अमेरिका पर अप्रत्यक्ष रूप से तंज कसा।

शी जिनपिंग ने पारंपरिक तौर पर रूस के करीबी मित्र और सहयोगी के रूप में अपनी भूमिका को मजबूत करते हुए हाल ही में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ अपने संबंधों को और गहरा किया है। यह विदेश नीति में एक स्पष्ट संकेत माना जा रहा है कि चीन अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी भूमिका को बढ़ाने का इच्छुक है, विशेषकर अमेरिका के बढ़ते प्रभाव के खिलाफ एक रणनीतिक ढाल के तौर पर।

मध्य पूर्व के विवादित इलाके में संघर्ष को लेकर शी का यह आह्वान ऐसे समय में आया है जब क्षेत्रीय स्थिरता खतरे में है और वैश्विक शक्तियां इस पर अपनी-अपनी नीतियां लागू कर रही हैं। उन्होंने युद्ध और हिंसा के परिणामस्वरूप होने वाली मानवीय विपदाओं पर चिंता जताई तथा सभी पक्षों से संवाद और शांति की अपील की।

यूक्रेन में रूस की सैन्य कार्रवाई को लेकर चीन ने आधिकारिक तौर पर कोई कठोर प्रतिक्रिया नहीं दी है, जिससे यह संकेत मिलता है कि वह इस मुद्दे पर तटस्थता बनाए रखना चाहता है और अमेरिका के खिलाफ अपने राजनीतिक लाभ को कायम रखने का प्रयास कर रहा है। शी के बयान में अमेरिका के विदेश नीति के तरीकों पर अप्रत्यक्ष आलोचना भी नजर आई, जिससे स्पष्ट होता है कि चीन एक वैकल्पिक वैश्विक शक्ति के रूप में उभरना चाहता है।

विश्लेषकों का मानना है कि इस प्रकरण से चीन के अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक एजेंडा के कई पहलुओं का पता चलता है, जिनमें रूस के साथ गठबंधन को मजबूत करना, मध्य पूर्व में शांति प्रयासों का समर्थन देना, और अमेरिका की वैश्विक भूमिका को चुनौती देना शामिल है। यह नई रणनीति संभावित रूप से विश्व राजनीति के सामान्य समीकरणों को प्रभावित कर सकती है।

अतः, शी जिनपिंग का यह रवैया चीन की विदेश नीति की गहराई और उसकी विश्व राजनीति में बढ़ती महत्वाकांक्षा का परिचायक है। आने वाले समय में इस दिशा में चीन की गतिविधियों पर विश्व समुदाय की पैनी नजर बनी रहेगी।

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