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अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया शुरुआती कारोबार में 8 पैसे गिरकर 95.78 पर पहुंचा

नई दिल्ली: भारतीय रुपया सोमवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर हो गया और शुरुआती कारोबार में 8 पैसे की गिरावट के साथ 95.78 पर पहुंच गया। यह विनिमय दर में इस सप्ताह की शुरुआत में ही रुके हुए कमजोर रुख का संकेत देती है। विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक बाजारों में अमेरिकी डॉलर की मजबूती तथा घरेलू आर्थिक संकेतकों का मिलाजुला प्रभाव रुपया पर दबाव डाल रहा है।

सुबह शुरूआती कारोबार के दौरान, रुपया 95.78 के स्तर पर पहुंच गया जो पिछले दिन के 95.70 से 8 पैसे कमजोर है। विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर की मांग बढ़ने और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में अनिश्चितता के कारण यह गिरावट देखी गई।

वित्तीय विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका में बढ़ती ब्याज दरें तथा ग्लोबल आर्थिक नीतियों में बदलाव के चलते डॉलर मजबूत हो रहा है, जो भारतीय मुद्रा पर दबाव डाल रहा है। इसके अलावा, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और भारत के व्यापार घाटे ने भी रुपए की कमजोरी में योगदान दिया है।

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने हाल ही में मुद्रा स्फीति को नियंत्रित करने और आर्थिक स्थिरता बनाए रखने के लिए कुछ नीतिगत कदम उठाए हैं, लेकिन इनका असर विनिमय दरों पर अभी सीमित दिख रहा है। निवेशकों और व्यापारियों के लिए यह स्थिति महत्वपूर्ण है क्योंकि मुद्रा की कमजोरी से आयात महंगा हो सकता है और मुद्रास्फीति बढ़ने का जोखिम रहता है।

विदेशी निवेशकों की दृष्टि से, भारत की आर्थिक वृद्धि और नीतिगत स्थिरता अभी भी आकर्षक हैं, लेकिन वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण निवेश प्रवाह प्रभावित हो सकते हैं। रुपया की कमजोरी से एक्सपोर्ट सेक्टर को कुछ राहत मिल सकती है, लेकिन घरेलू बाजार पर इसका विपरीत प्रभाव भी पड़ सकता है।

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि निवेशक विदेशी मुद्रा बाजार में उतार-चढ़ाव से सावधान रहें और दीर्घकालिक आर्थिक संकेतकों पर ध्यान केंद्रित करें। इसके अलावा, सरकार और RBI के द्वारा लिए जाने वाले आगामी कदम विनिमय दरों में स्थिरता लाने में सहायक हो सकते हैं।

कुल मिलाकर, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये की यह गिरावट अभी अस्थायी मानी जा रही है, लेकिन आने वाले दिनों में वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम और घरेलू नीतिगत निर्णय विनिमय दर के लिए निर्णायक होंगे।

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