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भारत और कोरिया ने द्विपक्षीय व्यापार घाटे को कम करने पर सहमति जताई

नई दिल्ली। भारत और दक्षिण कोरिया के बीच चल रही बातचीत में दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय व्यापार घाटे को कम करने के लिए सहमति व्यक्त की है। यह वार्ता भारत-कोरिया व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (CEPA) के उन्नयन को लेकर हो रही है, जो वर्ष 2010 में लागू हुआ था।

भारत-कोरिया CEPA ने दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में भारत का कोरिया के प्रति व्यापार घाटा बढ़ता गया है, जिससे दोनों देशों ने इस मुद्दे पर चर्चा करने की आवश्यकता महसूस की।

सरकारी सूत्रों के अनुसार, नई बातचीत में भारत ने अपनी निर्यात संभावनाओं को सुधारने और कोरियाई बाजार में भारतीय उत्पादों की पहुंच बढ़ाने की बात कही है। साथ ही, कोरिया ने भी अपने उत्पादों की तरजीह के साथ-साथ भारतीय बाजार में बेहतर निवेश के अवसर तलाशने की इच्छा जताई है।

इसके अलावा, दोनों देश तकनीकी सहयोग, विनिर्माण, और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में साझेदारी को मजबूत करने पर भी चर्चा कर रहे हैं। यह कदम दोनों पक्षों को आर्थिक दृष्टि से लाभान्वित करेगा और रोजगार सृजन में मददगार साबित होगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि CEPA के उन्नयन से न केवल व्यापार घाटे को कम किया जा सकेगा बल्कि आपसी सहयोग भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचेगा। दोनों देशों के बीच बढ़ता आर्थिक संबंध एशिया-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता और प्रगति के लिए सकारात्मक संदेश देगा।

अंतर्राष्ट्रीय व्यापार विश्लेषकों का कहना है कि भारत और कोरिया के बीच यह वार्ता वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में दोनों की स्थिति मजबूत करेगी। व्यापार संतुलन सुधारने के साथ-साथ यह समझौता नवाचार और तकनीकी विकास के अवसर भी प्रदान करेगा।

उम्मीद है कि जल्द ही दोनों देशों के अधिकारी इसे अंतिम रूप देंगे और इसे लागू कर व्यापारिक गतिविधियों को नई दिशा में ले जाएंगे। इस समझौते से भारत की निर्यात क्षमता में वृद्धि के साथ, कोरियाई निवेश और तकनीकी ज्ञान से भारतीय उद्योगों को मजबूती मिलेगी।

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