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कोई ‘मोटापा जीन’ नहीं: आपके जेनेटिक मेकअप को निश्चित किस्मत न समझें

नई दिल्ली। वैज्ञानिकों की नई शोध से यह स्पष्ट हो गया है कि किसी व्यक्ति में कुछ खास जीन वेरिएंट पाए जाने के बावजूद यह सुनिश्चित नहीं किया जा सकता कि वह व्यक्ति मोटापा का शिकार होगा या नहीं। यानि कि ‘मोटापा जीन’ नाम की कोई निश्चित जीन नहीं होती है जो सीधे मोटापे का कारण बने।

जैसे ‘मोटापा जीन’ नहीं है, वैसे ही ‘फैट जीन’, ‘आलस्य जीन’ या ‘भूख जीन’ जैसी कोई अवधारणा भी वैज्ञानिक दृष्टिकोण से मान्य नहीं है। वैज्ञानिकों का कहना है कि बीमारी और स्वास्थ्य से जुड़े जीन केवल एक हिस्सा हैं पूरी कहानी का। व्यक्ति का जीवनशैली, आहार, व्यायाम, पर्यावरणीय कारक और मानसिक स्वास्थ्य भी हमारी सेहत पर गहरा प्रभाव डालते हैं।

वैज्ञानिकों ने यह भी बताया कि जीन केवल हमारा संभावित आधार तय करते हैं, लेकिन अंततः कौन-कौन से कारक मिलकर हमारी सेहत और शरीरिक गठन को प्रभावित करते हैं, इसका हम अकादमिक और व्यावहारिक अध्ययन कर रहे हैं। मोटापा जैसे रोगों के लिए केवल जीन की भूमिका सीमित नहीं है।

पुरानी धारणाओं में जो ‘फैट जीन’ या ‘आलसी जीन’ के बारे में बातें प्रचलित थीं, वे सामान्य जनता में गलतफहमियां पैदा करती हैं। इससे गलत कारणों पर ध्यान दे कर गलत उपचार और सामाजिक अपमान हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि मोटापा कई कारकों का परिणाम है जिसमें मानसिक स्वास्थ्य, पोषण, पारिवारिक इतिहास के अलावा व्यक्तिगत आदतों का भी योगदान बड़ा होता है।

अतः हेल्थ सेक्टर को और अधिक जागरूक बनाना जरूरी है ताकि स्वास्थ्य से जुड़ी भ्रांतियों को दूर किया जा सके। साथ ही, आम लोगों को यह समझना आवश्यक है कि जीन का मतलब निर्धारित नियति नहीं, बल्कि संभावनाएं होती हैं। इस प्रकार सही जीवनशैली अपनाकर मोटापा जैसे रोगों से दूरी बनाई जा सकती है।

हालांकि जीनोमिक रिसर्च से भविष्य में बेहतर उपचार और रोगों का प्रबंधन संभव होगा, लेकिन अभी की वैज्ञानिक समझ यह साफ करती है कि जीन केवल आपकी किस्मत का एक छोटा हिस्सा होते हैं, पूरी तस्वीर नहीं।

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