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RGCB के वैज्ञानिकों ने मलेरिया परजीवी की दवा प्रतिरोधक क्षमता के नए तंत्र का पता लगाया

नई दिल्ली। मलेरिया के उपचार में आने वाली दवा प्रतिरोधक क्षमता ने हमेशा से चिकित्सा जगत के लिए एक बड़ी चुनौती प्रस्तुत की है। हाल ही में RGCB के वैज्ञानिकों ने मलेरिया परजीवी की दवा प्रतिरोधक क्षमता के पीछे एक नया तंत्र खोज निकाला है, जो इस बीमारी के बेहतर उपचार के लिए अहम साबित हो सकता है।

अध्ययन के अनुसार, जब मलेरिया परजीवी रक्त के रेटिकुलोसाइट्स (reticulocytes) को संक्रमित करता है, तो उन्हें एक संरक्षित वातावरण प्राप्त होता है। इस वातावरण में परजीवी तेजी से विकास कर पाता है और आर्टेमिसिनिन (artemisinin) जैसी दवाओं के कारण उत्पन्न ऑक्सीडेटिव नुकसान को बेहतर तरीके से सहन कर लेता है। इस खोज से यह स्पष्ट हुआ है कि परजीवी का यह व्यवहार उसकी दवा प्रतिरोधक क्षमता का एक प्रमुख कारण है।

रेटिकुलोसाइट्स रक्त के उन युवा लाल रक्त कोशिकाओं को कहा जाता है जो पूर्ण रूप से विकसित नहीं हुए होते। RGCB के वैज्ञानिकों ने अध्ययन में यह पाया कि मलेरिया परजीवी जब इन कोशिकाओं को संक्रमित करता है, तो उसे ऑक्सीडेटिव तनाव कम देखने को मिलता है, जिससे दवा का प्रभाव कम हो जाता है। आर्टेमिसिनिन पर आधारित उपचार अभी तक मलेरिया उपचार का मुख्य आधार रहे हैं, लेकिन इससे उत्पन्न दवा प्रतिरोधकता के कारण कई स्थानों पर इसके असर में कमी आई है।

इस अध्ययन के प्रमुख शोधकर्ता ने बताया, “हमने यह समझा है कि परजीवी किस प्रकार अपने मेजबान कोशिका के माध्यम से खुद को बचाता है और दवा के प्रभाव को कम करता है। यह नई जानकारी दवा विकास के क्षेत्र में नई दिशा प्रदान कर सकती है।” उन्होंने कहा कि इस खोज से मलेरिया के खिलाफ अधिक कारगर और टिकाऊ चिकित्सा समाधान विकसित किए जा सकेंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस खोज से न केवल मलेरिया की दवा प्रतिरोधक क्षमता को समझने में मदद मिलेगी, बल्कि नए उपचार पद्धतियों के विकास की भी संभावनाएं बढ़ेंगी। साथ ही, यह अध्ययन मलेरिया के इलाज के लिए नई रणनीतियाँ तैयार करने में भी सहायक होगा, जिससे रोग का प्रसार कम किया जा सकेगा।

मलेरिया एक जानलेवा बीमारी है जो विश्व के कई उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में व्यापक रूप से फैली हुई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आंकड़ों के अनुसार, हर वर्ष लाखों लोग मलेरिया के शिकार होते हैं और हजारों की मौत होती है। इस संदर्भ में प्रतिरोधी परजीवी की खोज अत्यंत महत्वपूर्ण है, जो अंततः मलेरिया समाप्ति के प्रयासों को मजबूत करेगी।

RGCB की यह नवीनतम रिसर्च मलेरिया से जुड़े वैश्विक स्वास्थ्य संकट की एक मजबूत समझ प्रस्तुत करती है और उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही इसके आधार पर प्रभावी दवा और इलाज तैयार हो सकेगा। ये खोज मलेरिया नियंत्रण एवं उन्मूलन के लिए एक मील का पत्थर साबित हो सकती है।

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