साक्षात्कार | स्टीव ब्रूसैट बताते हैं क्यों भारत हो सकता है दुनिया का अगला डायनासोर हॉटस्पॉट

नई दिल्ली: प्रसिद्ध पेलियंटोलॉजिस्ट और “जुरैसिक वर्ल्ड” फिल्म के सलाहकार स्टीव ब्रूसैट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण बयान दिया है जिसमें उन्होंने कहा है कि भारत डायनासोर अनुसंधान के लिए एक अहम महाद्वीप बन सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि भारत की उपमहाद्वीप में पृथ्वी के सबसे महत्वपूर्ण डायनासोर रहस्यों को छुपाए हुए है, बशर्ते कि युवा वैज्ञानिक इस क्षेत्र में गहरी रुचि और खोजबीन करें।
ब्रूसैट का मानना है कि भारत की भूगर्भीय संरचनाएं और जीवाश्म संरक्षित प्राचीन जीवन के प्रमाण यहां के भूगर्भीय इतिहास को समझने में मदद कर सकते हैं। उन्होंने भारत के युवा वैज्ञानिकों को प्रोत्साहित किया कि वे इस क्षेत्र में शोध करें क्योंकि यहां छिपे ऐसे कई अवशेष हैं जिनकी खोज पूरी दुनिया के लिए बड़ी उपलब्धि हो सकती है।
उन्होंने बताया कि भारत में अभी भी डायनासोर जीवाश्मों के अध्ययन और खोज की प्रक्रिया में कई संभावनाएं खुली हैं। पृथ्वी के इतिहास में कई महत्वपूर्ण डायनासोर खनिजों की खोज भारत में हो सकती है, जो न केवल स्थानीय बल्कि वैश्विक वैज्ञानिक समुदाय के लिए नई समझ ला सकती है।
स्टीव ब्रूसैट ने इस बात पर भी जोर दिया कि सरकार और शैक्षणिक संस्थान इस दिशा में और निवेश करें ताकि युवा वैज्ञानिकों को बेहतर उपकरण, सुविधा और वित्तीय सहायता मिल सके। इससे भारत में डायनासोर जीवाश्मों के अध्ययन और संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा, जिससे देश का वैज्ञानिक और शैक्षिक स्तर भी ऊंचा होगा।
भारतीय उपमहाद्वीप में विभिन्न भूभौतिकीय क्षेत्रों के कारण यहाँ डायनासोर के जीवाश्मों की विविधता देखने को मिलती है। इससे पता चलता है कि भारत शायद उन क्षेत्रों में से एक है जहाँ डायनासोर का विकास और अस्तित्व लंबा रहा।
ब्रूसैट के अनुसार, इस क्षेत्र के जीवाश्मों की सही खोज और विश्लेषण से न केवल पृथ्वी के प्रागैतिहासिक काल के बारे में अधिक पता चलेगा, बल्कि आने वाले वर्षों में विज्ञान के अन्य क्षेत्रों में भी नई खोजों के द्वार खुलेंगे। इसके लिए आवश्यक है कि युवा शोधकर्ता सक्रिय रूप से इस क्षेत्र की यात्रा करें और खोज में लग जाएं।
विज्ञान जगत में इस अपार संभावनाओं को देखते हुए कई भारतीय विश्वविद्यालय और शोध संस्थान भी इस दिशा में विस्तार से काम कर रहे हैं। वे बेहतर शोध कार्यक्रम और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से भारत को डायनासोर अनुसंधान का केंद्र बनाने की दिशा में प्रयासरत हैं।
अंततः, स्टीव ब्रूसैट का यह सुदृढ़ मानना है कि भारत भविष्य में डायनासोर अनुसंधान और जीवाश्म विज्ञान की दुनिया में एक प्रमुख स्थान हासिल कर सकता है, यदि यहाँ के युवा वैज्ञानिक और शोधकर्ता सही दिशा में मेहनत करें और तमाम बाधाओं को पार करें।



