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सरकार 2028 तक असम को ₹10 लाख करोड़ की अर्थव्यवस्था बनाने में लगेगी: सीएम हिमंता बिस्वा सरमा

गुवाहाटी, 27 अप्रैल: असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा है कि यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) बिल को संसद के समक्ष प्रस्तुत करना उनकी सरकार की महिलाओं के अधिकारों के प्रति प्रतिबद्धता का प्रमाण है, विशेषकर अल्पसंख्यक समुदाय की महिलाओं के लिए। उन्होंने इस अवसर पर महिलाओं के कल्याण पर विशेष जोर देते हुए कहा कि यह बिल उनके लिए न्याय और समानता सुनिश्चित करेगा।

मुख्यमंत्री ने प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि यूसीसी बिल का उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए समान कानून सुनिश्चित करना है, जिससे महिलाओं की सामाजिक, आर्थिक और कानूनी स्थिति मजबूत हो सके। उन्होंने कहा, “हमारी सरकार अल्पसंख्यक समुदाय की महिलाओं के अधिकारों के लिए संकल्पित है। यूसीसी बिल इसे एक ठोस रूप देगा।”

सरमा ने आगे कहा कि असम में महिलाओं को शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के क्षेत्र में सशक्त बनाने के लिए सरकार कई योजनाएं लागू कर रही है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि महिलाओं की भागीदारी राज्य के विकास में अत्यंत महत्वपूर्ण है।

इस कानून के तहत, विभिन्न धार्मिक समुदायों में प्रचलित पारंपरिक कानूनों को एक समान और समावेशी नागरिक कानून में परिवर्तित किया जाएगा, जिससे महिलाओं को तलाक, संपत्ति अधिकार और संरक्षण जैसे मामलों में बेहतर न्याय मिलेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे महिलाओं की सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित होगी और विषमता कम होगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में सकारात्मक पहल है, जो असम सहित पूरे देश में महिलाओं के अधिकारों को मजबूत करेगा। जनता की प्रतिक्रिया भी आम तौर पर सकारात्मक रही है, जिसमें अधिकतर लोग इसे महिलाओं के लिए न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानते हैं।

असम सरकार के इस निर्णय को लेकर राज्य में महिला संगठनों एवं नागरिक समाज ने भी समर्थन जताया है। उन्होंने मानवीय और कानूनी दृष्टि से इस बिल को आवश्यक बताया ताकि सभी महिलाओं को समान अधिकार मिल सकें और कोई भी भेदभाव न हो।

मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि सरकार लगातार अल्पसंख्यक समुदायों के साथ संवाद स्थापित कर उनके सुझावों को भी सुन रही है, ताकि कानून सभी के हित में हो सके। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह पहल राज्य में सामाजिक समरसता और महिला सशक्तिकरण को और बढ़ावा देगी।

इस नए अध्याय के साथ, असम सरकार अपनी सामाजिक न्याय की नीति को और मजबूत करते हुए एक समृद्ध और समान समाज के निर्माण की दिशा में अग्रसर है।

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