सेहत

भारत के पहले डेंगू वैक्सीन के तीसरे चरण के क्लीनिकल ट्रायल में नामांकन लगभग पूरा, आईसीएमआर ने बताया

डेंगू के बढ़ते प्रकोप के बीच भारत में अभी तक कोई एन्टीवायरल उपचार या प्रमाणित वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। देश उन 30 देशों की सूची में शामिल है जहाँ डेंगू संक्रमण के मामले सबसे अधिक दर्ज होते हैं। इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) ने भारत के पहले डेंगू वैक्सीन के विकास और परीक्षण में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।

आईसीएमआर के अनुसार, इस वैक्सीन के तीसरे चरण के क्लीनिकल ट्रायल के लिए नामांकन लगभग पूरा हो चुका है। यह तीसरा चरण वैक्सीन की सुरक्षा और प्रभावशीलता का अंतिम चरण परीक्षण होता है, जो यह सुनिश्चित करता है कि वैक्सीन व्यापक जनसंख्या पर कितनी कारगर और सुरक्षित है।

देश में डेंगू से निपटने के लिए वैक्सीन की आवश्यकता अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है क्योंकि मौजूदा समय में उपचार केवल लक्षणों को कम करने तक सीमित है और इसका कोई निश्चित इलाज उपलब्ध नहीं है। डेंगू बुखार हर वर्ष लाखों लोगों को प्रभावित करता है और कई बार इसकी वजह से मृत्यु भी होती है।

विशेषज्ञों ने बताया कि इस वैक्सीन के सफल परीक्षण के बाद, भारत में डेंगू के विरुद्ध एक प्रभावी रोकथाम का साधन उपलब्ध हो सकेगा, जिससे महामारी में कमी आएगी और स्वास्थ्य सेवाओं पर भी दबाव कम होगा। आईसीएमआर के वैज्ञानिक इस वैक्सीन के साथ उच्च उम्मीदें लगाए हुए हैं और लगातार निगरानी और मूल्यांकन कर रहे हैं।

फिलहाल तीसरे चरण के ट्रायल में अनेक राज्यों से हजारों स्वयंसेवक शामिल हैं, जो वैक्सीन की प्रभावशीलता के विविध पहलुओं को समझने में मदद करेंगे। इस पहल से भारत न केवल डेंगू नियंत्रण में सफल होगा बल्कि विश्व स्वास्थ्य समुदाय में भी अपनी भूमिका मजबूत करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि उचित निगरानी, जागरूकता और सफल वैक्सीन के संयुक्त प्रयास से डेंगू जैसी बीमारी पर लगाम लगाई जा सकती है।

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