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एफपीआई पलायन जारी, जून की पहली पखवाड़े में ₹62,800 करोड़ की निकासी

नई दिल्ली: नेश्नल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (NSDL) के डेटा के अनुसार, 2026 के हर महीने में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने शुद्ध विक्रेता का रुख अपनाया है, सिवाय फरवरी के। इस आंकड़े से पता चलता है कि जून की पहली पखवाड़े में भी बाजार से भारी निकासी जारी रही, जहाँ ₹62,800 करोड़ से अधिक की पूंजी भारतीय इक्विटी बाजारों से बाहर निकाली गई।

FPIs का यह निरंतर शुद्ध विक्रय प्रवृत्ति भारतीय स्टॉक मार्केट के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, ब्याज दरों में बदलाव, और बढ़ती भू-राजनीतिक तनाव ने निवेशकों के मनोबल को प्रभावित किया है, जिससे उन्होंने अपने पोर्टफोलियो से जोखिम कम करने की रणनीति अपनाई है।

विशेष रूप से फरवरी को FPIs ने बाजार में शुद्ध खरीदारी की थी, लेकिन इसके बाद से फंड बहिर्वाह का सिलसिला बढ़ता गया है। इसके पीछे डॉलर की मजबूती, अमेरिका में फेडरल रिजर्व की नीतियाँ, और अन्य विकसित बाजारों की आर्थिक नीतियाँ प्रमुख कारण मानी जा रही हैं।

भारतीय शेयर बाजार में इस तरह की बड़ी मात्रा में पूंजी निकासी से बाजार में अस्थिरता आने का अंदेशा रहता है। हालांकि, कई घरेलू निवेशक और म्यूचुअल फंड इस अवसर का लाभ उठाकर शेयर्स खरीद रहे हैं, जिससे बाजार में कुछ स्थिरता बनी हुई है।

विश्लेषकों का कहना है कि FPIs की निकासी का ट्रेंड तब तक जारी रह सकता है जब तक वैश्विक अर्थव्यवस्था में सकारात्मक संकेत नहीं मिलते। इसके अलावा, भारत की आर्थिक नीतियों और विकास दर पर भी नजर बनी हुई है, जो निवेशकों के भरोसे को स्थिर कर सकती है।

अंत में, यह भी कहा जा सकता है कि विदेशी निवेशकों की निकासी का सिलसिला जोखिम भरे परिदृश्य को दर्शाता है लेकिन घरेलू बाजार के निवेशक इसे अवसर के रूप में देख सकते हैं। भारतीय बाजार की मजबूती और दीर्घकालिक संभावनाएं निवेश के लिए अभी भी आकर्षक हैं।

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