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एलपीजी कीमतों में वृद्धि: सरकार का दावा, वैश्विक दरों में 46% बढ़ोतरी के बावजूद भारत में दाम सबसे कम

नई दिल्ली। भारत सरकार ने कहा है कि घरेलू एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति लागत 1,600 रुपये से अधिक पहुंच गई है, जो कि इस वर्ष फरवरी के अंत में पश्चिम एशिया में युद्ध छिड़ने के बाद अंतरराष्ट्रीय कीमतों में आई भारी वृद्धि का परिणाम है। इस घोषणा के माध्यम से सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि वैश्विक दबावों के बावजूद भारत में गैस के दाम दुनिया के अन्य देशों की तुलना में काफी कम हैं।

सरकार के एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में सीधे तौर पर अंतरराष्ट्रीय बाजार के हालात का प्रभाव पड़ता है। फरवरी अंत से शुरू हुए युद्ध के कारण क्रूड ऑयल और एलपीजी के दाम तेजी से बढ़े हैं, जिससे घरेलू आपूर्ति की लागत भी बढ़ी है। वहीं, भारत की नीतियां और सब्सिडी व्यवस्था इस बढ़ोतरी को उपभोक्ताओं तक पहुंचने से सीमा तक रोके रखने में मदद कर रही हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि ग्लोबल मार्केट में एलपीजी के दामों में 46 प्रतिशत की वृद्धि के बावजूद भारत में कीमतें तुलनात्मक रूप से कम बनी हुई हैं। सरकार ने यह भी जोर दिया कि घरेलू उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए विशेष कदम उठाए गए हैं ताकि एलपीजी का पहुंच योग्य मूल्य बना रहे।

एलपीजी आपूर्ति की लागत बढ़ने के पीछे कई महत्वपूर्ण कारण हैं, जिनमें प्रमुख हैं युद्ध की वजह से आपूर्ति में बाधाएं, पारितोषिक मुद्रास्फीति, और वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितताएं। इन कारकों ने सीधे तौर पर घरेलू बाजार में सिलेंडर की खरीद लागत को प्रभावित किया है।

सरकार ने बताया कि वह लगातार इन परिस्थितियों की समीक्षा कर रही है और उपभोक्ताओं को न्यूनतम प्रभाव देने के लिए रणनीतियां बना रही है। इसके अलावा, घरेलू उत्पादकों को प्रोत्साहित करने के लिए भी कदम उठाए जा रहे हैं ताकि देश में एलपीजी के उत्पादन को बढ़ाया जा सके और आयात पर निर्भरता कम की जा सके।

सरकार की यह प्रतिक्रिया उन सवालों के बीच आई है जो एलपीजी की बढ़ती कीमतों को लेकर आम जनता तथा मीडिया में उठ रहे थे। कई विशेषज्ञों के अनुसार, भारत सरकार की नीति अंतत: उपभोक्ताओं के हित में ही काम कर रही है, जिससे घरेलू बाजार में स्थिरता बनी रहती है।

अंत में, सरकार ने उपभोक्ताओं से आग्रह किया है कि वे अपने गैस उपयोग में सावधानी बरतें और समझदारी से ऊर्जा की बचत करें, ताकि बढ़ती कीमतों के प्रभाव को कम किया जा सके। साथ ही, सरकार ने कहा है कि यदि आवश्यक हुआ तो वे और भी नीतिगत कदम उठा सकती है ताकि एलपीजी की पहुंच उचित और खर्चे में बने रहे।

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