
हिंदू धर्म की पौराणिक कथाओं में हनुमान जी का जन्म अत्यंत महत्वपूर्ण और रोचक प्रसंग है। हनुमान को भगवान राम का परम भक्त और संकटमोचन माना जाता है। उन्हें भगवान शिव का अवतार या पुत्र मानने की परंपरा भी प्राचीन काल से चली आ रही है। इस लेख में जानेंगे कि हनुमान जी को भगवान शिव का पुत्र क्यों माना जाता है और उनकी जन्मकथा क्या है।
हनुमान जी की जन्म कथा महाभारत, रामायण तथा कई अन्य प्राचीन ग्रंथों में मिलती है। कथा के अनुसार, जब राम के जन्म के लिए एक विशेष शक्तिशाली भक्त की आवश्यकता थी, तब भगवान शिव ने अपनी शक्ति व अपने भाग्य को विभाजित किया और मानव रूप में जन्म लेने के लिए आए। उन्हें पवनदेव की पुत्री अंजना और केसरी के घर जन्म मिला।
हनुमान जी का जन्म स्वयं में एक दिव्य घटना थी। कहा जाता है कि भगवान शिव ने पवनदेव की आराधना के फलस्वरूप अपनी दिव्य ऊर्जा उनके पुत्र हनुमान के रूप में प्रकट की। इस कारण हनुमान जी को शिव का अवतार या पुत्र माना जाता है। इसके अलावा, हनुमान जी की शक्तियों और गुणों में भगवान शिव की कुछ विशेषताएं स्पष्ट रूप से दिखाई देती हैं जैसे असीम बल, निर्विकार भक्ति और वीरता।
हनुमान जी का उपासना के लिए भी भारी संख्या में मंदिर स्थापित हैं जो उनकी पौराणिक कड़ी को और भी पुष्ट करते हैं। भक्ति और शक्ति के प्रतीक के रूप में हनुमान को लोगों का अत्यंत प्रिय देवता माना जाता है।
आखिर में कहा जा सकता है कि हनुमान जी भगवान शिव के दिव्य रूप हैं, जो भक्तों को आशा देते हैं कि ईश्वर की भक्ति और शक्ति का कोई मुकाबला नहीं। उनके जन्म की कथा इस बात की पुष्टि करती है कि धर्म और भक्ति की रक्षा के लिए दिव्यता हर समय सजीव रहती है।



