सेहत

क्या फेफड़ों के कैंसर को दवा के माध्यम से रोका जा सकता है

नई दिल्ली: हाल ही में किए गए एक शोध ने फेफड़ों के कैंसर के जोखिम को पहचानने में एक महत्वपूर्ण प्रोटीन सिग्नेचर की खोज की है, जो उच्च जोखिम वाले लोगों की पहचान कर सकता है। इस खोज के आधार पर अगर यह प्रोटीन सिग्नेचर वास्तव में उन व्यक्तियों की सही पहचान करता है, जिन्हें फेफड़ों के कैंसर का खतरा अधिक होता है, तो यह स्क्रीनिंग कार्यक्रमों को अधिक प्रभावी बनाने में मददगार हो सकता है।

फेफड़ों का कैंसर दुनिया भर में मृत्यु का एक प्रमुख कारण बना हुआ है। स्क्रीनिंग तकनीकों में सुधार से पहले से ही जोखिम वाले लोगों का जल्दी पता लगाना संभव हो सकता है, जिससे इलाज जल्दी शुरू किया जा सके और रोग की प्रगति को रोका जा सके। शोधकर्ताओं का मानना है कि उच्च जोखिम वाले व्यक्तियों की पहचान करने वाली यह तकनीक फेफड़ों के कैंसर की रोकथाम और उपचार के लिए एक नई दिशा प्रस्तुत कर सकती है।

लेकिन इस शोध की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि क्या Canakinumab नामक दवा वास्तव में फेफड़ों के कैंसर की घटना या उसकी प्रगति को कम कर सकती है या नहीं। फिलहाल इस विषय पर कोई निश्चित प्रमाण नहीं मिला है। Canakinumab एक प्रकार की एंटी-इन्फ्लेमेटरी दवा है जिसका उपयोग अन्य बीमारियों के इलाज के लिए किया जाता रहा है, लेकिन फेफड़ों के कैंसर के लिए इसकी प्रभावकारिता अभी भी स्पष्ट नहीं हुई है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस दवा के द्वारा फेफड़ों के कैंसर के मामलों में कमी आ सकती है, लेकिन इसकी पुष्टि के लिए और अधिक बड़े पैमाने के, नियंत्रित और विस्तृत clinical trials की जरूरत है। जब तक ऐसे प्रमाण प्राप्त नहीं होते, तब तक इस दवा को फेफड़ों के कैंसर की रोकथाम के लिए व्यापक रूप से उपयोग में लाना संभव नहीं होगा।

अनुसंधानकर्ताओं ने यह भी बताया कि फेफड़ों के कैंसर के जोखिम वाले व्यक्तियों के लिए सही प्रोटीन सिग्नेचर को पहली बार पहचाना गया है, जो भविष्य में फार्माकोलॉजिकल इंटरवेंशन्स और स्क्रीनिंग प्रोग्राम्स को बेहतर बनाएगा। यह उपलब्धि चिकित्सा जगत के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है, क्योंकि फेफड़ों के कैंसर के लिए प्राथमिक रोकथाम और शुरुआती पहचान ही मृत्यु दर को घटाने में निर्णायक भूमिका निभा सकती है।

अगर भविष्य में Canakinumab या ऐसी कोई अन्य दवा इस जोखिम को कम कर पाती है, तो यह फेफड़ों के कैंसर को काबू करने की दिशा में बड़ी प्रगति होगी। फिलहाल, विशेषज्ञों का सुझाव है कि लोग धूम्रपान से बचें, प्रदूषण को नियंत्रित करने वाले उपाय अपनाएं और नियमित स्वास्थ्य जांच कराते रहें ताकि फेफड़ों के कैंसर का खतरा कम किया जा सके।

Source

Related Articles

Back to top button