सेहत

आईएपी से इस्तीफा देने के बाद हैदराबाद की बालरोग विशेषज्ञ सिवरांजनी सन्तोष ने फार्मा प्रभाव का आरोप लगाते हुए ORSL प्रचार की जांच की मांग की

हैदराबाद। बालरोग विशेषज्ञ डॉक्टर सिवरांजनी सन्तोष ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में आईएपी (इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स) के नेतृत्व पर फार्मा कंपनियों के अनुचित प्रभाव का आरोप लगाया है। सिवरांजनी ने अपने इस्तीफे के बाद कहा है कि अब उनके ऊपर कोई रोक-टोक नहीं है और वे खुलेआम अकादमी की नेतृत्व में खामियां और संदिग्ध गतिविधियां उजागर करना चाहती हैं।

डॉ. सन्तोष ने अपनी पोस्ट में स्पष्ट किया कि उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया है, जिससे वह किसी भी दबाव या प्रतिबंध के बिना आईएपी के आंतरिक मामलों पर अपनी बात रख सकती हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें शैक्षणिक संस्थान के शीर्ष नेतृत्व द्वारा ORSL (ऑनलाइन रिजनल साइंटिफिक लेक्चर) कार्यक्रम के प्रचार और उससे जुड़े फार्मा प्रभाव पर गंभीर आशंकाएं हैं।

उन्होंने खासतौर पर यह सवाल उठाया कि किस प्रकार फार्मा कंपनियां अकादमी के निर्णयों में किंचित अप्रत्यक्ष रूप से दखल देती हैं और कैसे यह प्रभाव बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़ी चिकित्सा नीतियों को प्रभावित कर सकता है। डॉ. सन्तोष ने आग्रह किया है कि इस मामले में एक स्वतंत्र जांच होनी चाहिए ताकि सभी तथ्यों का खुलासा हो सके और बाल चिकित्सा क्षेत्र की विश्वसनीयता बनी रहे।

इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स के एक प्रवक्ता ने इस विषय पर फिलहाल कोई आधिकारिक टिप्पणी देने से इंकार कर दिया है, लेकिन उन्होंने कहा है कि संस्था किसी भी आरोप की जांच के लिए तैयार है। बाल चिकित्सा समुदाय में इस मामले ने चर्चा तेज कर दी है और विशेषज्ञों ने आंकड़ों के आधार पर तथ्यों की जांच की मांग जोर-शोर से की है।

यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब चिकित्सा संस्थान और फार्मा कंपनियों के बीच पारदर्शिता पर लगातार सवाल उठते रहे हैं, और विशेषज्ञ इस बात पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं कि इस प्रकार के प्रभाव से मरीजों का हित न प्रभावित हो।

डॉ. सन्तोष का ये बोलना साफ संकेत है कि चिकित्सा संस्थान के उच्चतम नेतृत्व में सुधार की आवश्यकता है और ऐसे प्रभावों को खत्म करने के लिए कड़े कदम उठाने होंगे। इस जांच के परिणाम बच्चे रोग विशेषज्ञ समुदाय के लिए दिशा निर्देश तय करेंगे और चिकित्सा क्षेत्र में विश्वास बहाल करेंगे।

अंततः, इस विवाद ने दिखा दिया है कि संस्थागत पारदर्शिता और जिम्मेदारी ही स्वस्थ चिकित्सा प्रणाली की कुंजी है, और यह भी कि जब अनुभवी पेशेवर अपनी आवाज़ उठाते हैं, तो सुधार की दिशा में नए द्वार खुलते हैं।

Source

Related Articles

Back to top button