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भारत की आर्थिक विकास दर FY27 में निवेश और खपत में कमी के कारण 6.6% पर धीमी होने की संभावना: BMI

नई दिल्ली। Business Monitor International (BMI) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, भारत की आर्थिक विकास दर वित्तीय वर्ष 2026-27 (FY27) में 6.6 प्रतिशत पर आ सकती है। यह अनुमान आरबीआई के अपने पूर्वानुमान के अनुरूप है, जो देश की वृद्धि दर में धीमी होने की संभावना को दर्शाता है।

BMI की रिपोर्ट में कहा गया है कि निवेश और उपभोग में सुस्ती के कारण आर्थिक वृद्धि पर अवरोध पड़ सकते हैं। यह संकेत करता है कि भारत की अर्थव्यवस्था पांच वर्षों से तेज़ी से बढ़ने की स्थिति से थोड़ी धीमी मोड़ ले सकती है। खासतौर पर, पूंजीगत व्यय में कमी और घरेलू खपत में मंदी प्रमुख कारण हो सकते हैं जिससे आर्थिक विकास दर पर दबाव पड़ेगा।

हालांकि, यह भी माना जा रहा है कि सरकार कई नीतिगत सुधार और मौद्रिक प्रोत्साहन उपायों के जरिए आर्थिक गतिविधियों को पुनः सक्रिय करने की कोशिश करेगी। RBI ने भी अपने वार्षिक अनुमान में FY27 के लिए 6.6 फीसदी विकास दर लागू की है, जो कि पिछले वर्षों की तुलना में थोड़ा कम है परंतु आर्थिक स्थिरता की दिशा में एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं, ऊर्जा की महंगाई, और आपूर्ति श्रृंखला संबंधी बाधाओं ने भारत के निवेशक विश्वास को प्रभावित किया है। इन बाहरी कारकों के चलते विकास दर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा, जो सामग्री मांग और उत्पादन गतिविधियों में कमी के रूप में सामने आया है।

इसके अतिरिक्त, उपभोक्ताओं की ब्याज दरों में वृद्धि और इंफ्लेशन की चिंता ने उनकी खर्च करने की क्षमता को सीमित किया है। इससे घरेलू खपत में गिरावट आ रही है जो भारत की आर्थिक वृद्धि का एक बड़ा स्तंभ है।

सरकार के तरफ से यह भी प्रयास किए जा रहे हैं कि विभिन्न क्षेत्रों में निवेश आकर्षित किया जा सके और उत्पादकता बढ़ाने के लिए नवाचार को प्रोत्साहित किया जाए। इन पहलों के माध्यम से FY27 में आर्थिक विकास को फिर से पटरी पर लाया जा सकेगा।

अंततः, BMI और RBI दोनों के अनुमानों के अनुरूप भारत की अर्थव्यवस्था FY27 में 6.6% के करीब बढ़ेगी, हालांकि इसे पहले की अपेक्षा धीमा माना जा रहा है। यह वृद्धि भारत की विशाल और विविध अर्थव्यवस्था के टिकाऊ विकास की क्षमता को प्रदर्शित करती है, बशर्ते निवेश और खपत को पुनः गति मिले।

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