कारोबार

भारत की आर्थिक विकास दर घटकर 6.6% रह सकती है, निवेश और खपत में मंदी के कारण: BMI

नई दिल्ली: बिजनेस मॉनिटर इंटरनेशनल (BMI) ने वित्त वर्ष 2027 के लिए भारत की आर्थिक विकास दर को लेकर एक नई रिपोर्ट जारी की है, जिसमें अनुमान लगाया गया है कि देश की विकास दर 6.6 प्रतिशत तक सीमित रह सकती है। यह अनुमान भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के दावों के अनुरूप है जिसने इसी दर से विकास की भविष्यवाणी की है।

BMI ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि निवेश और उपभोग में धीमी गति के कारण भारत की आर्थिक वृद्धि दर इस स्तर तक पहुंचने में असमर्थ रहेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक चुनौतियों, अनिश्चितताओं और घरेलू मांग में गिरावट के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था को यह समायोजन करना पड़ सकता है।

निवेश और उपभोग में धीमापन

रिपोर्ट के अनुसार, निवेश में कमी मुख्य रूप से उद्यमों और उद्योगों में अनिश्चितता के कारण हो रही है। साथ ही, उपभोक्ता व्यय भी अपेक्षाकृत धीमा रहने का अनुमान है, जो आर्थिक वृद्धि को प्रभावित करेगा। हालांकि सरकार ने कई योजनाएं शुरू की हैं जो निवेश प्रवाह को पुनः सक्रिय करने का प्रयास कर रही हैं, लेकिन अभी स्थिति पूरी तरह स्थिर नहीं हुई है।

आरबीआई और BMI के अनुमान

भारतीय रिजर्व बैंक ने पिछले कुछ वित्तीय वर्षों के आर्थिक आंकड़ों और वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों के आधार पर FY27 के लिए 6.6% विकास दर का अनुमान लगाया है। BMI की रिपोर्ट इसी अनुमान के अनुरूप है, जिससे यह माना जा रहा है कि सरकार और केंद्रीय बैंक की आर्थिक नीतियां संतुलित हैं। हालांकि विश्लेषकों का कहना है कि आर्थिक सुधार गति धीमी हो सकती है और सतत प्रयासों की जरूरत होगी।

आर्थिक विशेषज्ञ क्या कह रहे हैं?

अर्थशास्त्रियों ने इस रिपोर्ट को एक संकेत के रूप में देखा है कि भारत को निवेश और उपभोग दोनों क्षेत्रों में समेकित प्रयास करने होंगे। विश्लेषक सुझाव देते हैं कि यदि नीति निर्माताओं ने उचित कदम उठाए, तो विकास दर को 7% या उससे अधिक स्तर पर लाना संभव होगा। वहीं, वैश्विक बाजार की अस्थिरता और घरेलू वित्तीय गतिरोध इस रास्ते में बाधाएं पैदा कर सकते हैं।

कुल मिलाकर, FY27 के लिए भारत की आर्थिक स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि निवेशकों और उपभोक्ताओं का विश्वास मजबूत होता है या नहीं। सरकार, RBI और अन्य संस्थागत निकायों के लिए यह आवश्यक होगा कि वे सकारात्मक और सहयोगी माहौल बनाएं ताकि भारतीय अर्थव्यवस्था निरंतर विकास कर सके।

Source

Related Articles

Back to top button